भारत चीन के बीच चार समझौते, भारत से क्षेत्रीय शांति के लिए ‘रचनात्मक भूमिका’ का आग्रह

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बीजिंग । भारत से क्षेत्रीय शांति के लिए ‘रचनात्मक भूमिका’ का आग्रह करने के साथ-साथ चीन ने भारत के साथ खेल, संस्कृति तथा पारंपरिक दवाओं के क्षेत्र में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने और राज्य को दो केेंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच तीन दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंचे विदेश मंत्री डॉ। एस जयशंकर की मौजूदगी में चारों समझौतों तथा समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये।
इस समझौते में द्विपक्षीय मामले, 2020 में सहयोग पर चीन के विदेश मंत्रालय और भारतीय विदेश मंत्रालय के बीच ‘प्रोटोकॉल’ को लागू करने की कार्य योजना शामिल है। इस पर डॉ जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हस्ताक्षर किए। भारत ने चीन से सोमवार को कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि किसी भी प्रकार का द्विपक्षीय मतभेद किसी विवाद में तब्दील न हो। 
भारत ने यह टिप्पणी तब की जब चीन ने कहा कि वह कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तथा उसकी जटिलताओं पर करीब से नजर रख रहा है। साथ ही, चीन ने भारत से क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व के लिए ‘रचनात्मक भूमिका’ निभाने का आग्रह किया। 
इससे पूर्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के उपराष्ट्रपति वांग किशान से मुलाकात की और इसके बाद विदेश मंत्री वांग यी के साथ प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की। वांग ने जयशंकर का स्वागत किया और कहा, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों के आधार पर हमारे बीच पारस्परिक लाभकारी सहयोग हो सकता है। यह मूलभूत हित और हमारे लोगों के दीर्घकालिक हित में है तथा यह वैश्विक शांति और मानव प्रगति में योगदान देगा।
उन्होंने कहा, चीन और भारत दो बड़े देश हैं तथा इस नाते उनके ऊपर क्षेत्रीय शांति और स्थायित्व बनाये रखने की अहम जिम्मेदारी है।  मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद जयशंकर चीन का दौरा करने वाले पहले भारतीय मंत्री हैं। उनका यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब भारत ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करते हुए उसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों में बांट दिया है। हालांकि, उनका दौरा संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के भारत के फैसले से बहुत पहले तय हो चुका था। जयशंकर की यह यात्रा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की नौ अगस्त को हुई चीन यात्रा के बाद हो रही है। मुलाकात के दौरान अपनी शुरुआती टिप्पणी में जयशंकर ने कहा, जैसा कि आप जानते हैं कि भारत और चीन के बीच संबंधों का वैश्विक राजनीति में बेहद विशिष्ट स्थान है। दो साल पहले हमारे नेता अस्ताना में एक आम सहमति पर पहुंचे थे कि ऐसे समय में जब दुनिया में पहले से अधिक अनिश्चितता है, भारत और चीन के बीच संबंध स्थिरता के परिचायक होने चाहिए।
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई शिखर वार्ता का जिक्र करते हुए कहा, उसे सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि हमारे बीच अगर कोई मतभेद है तो वह विवाद में तब्दील नहीं होना चाहिए। यह बेहद संतोष की बात है कि पिछले वर्ष वुहान सम्मेलन में हमारे नेताओं के बीच बहुत गहरी, रचनात्मक और खुलकर बातचीत हुई थी। हमने तब से उसके असर को द्विपक्षीय संबंधों पर देखा है। जयशंकर ने कहा, हमारे नेताओं द्वारा हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने में दिये जाने वाले योगदान के मद्देनजर आज यह महत्वपूर्ण है कि संबधों के लिए जनसमर्थन जुटाया जाये। हमने एक-दूसरे की घोर चिंताओं के प्रति संवेदनशील होकर और मतभेदों को ठीक से संभालकर बरसों बरस यह किया है।
जयशंकर ने कहा, मेरे लिए यह खुशी की बात है कि विदेश मंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल की शुरुआत में ही मुझे चीन आने और आपके साथ उच्चस्तरीय तंत्र की सह-अध्यक्षता करने तथा हमारे दो नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की तैयारी करने का अवसर मिला। 




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