स्मृति शेष / सुषमा स्वराज ने रायपुर एम्स को तुरंत मंजूर किया और बनते तक साथ खड़ी रहीं





रायपुर. सुषमा स्वराज का छत्तीसगढ़ से गहरा रिश्ता रहा है। केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने इस राज्य को उदारता पूर्वक सुविधाएं मुहैय्या कराईं। 2001 में जब रायपुर में एम्स खोलने का प्रस्ताव उनके सामने रखा तो वे तत्काल तैयार हो गईं और एक महीने बाद ही रायपुर आकर स्थल का चयन भी कर लिया। टाटीबंध में आज जहां पर एम्स संचालित हो रहा है वह दरअसल रायपुर का पुराना टीबी अस्पताल परिसर हुआ करता था। सुषमा जब स्थल चयन के लिए रायपुर आईं थीं तब उनके साथ रायपुर का सांसद होने के नाते मैं भी था।

  1. टीबी अस्पताल के अलावा उनको शहर में 2-3 और जगह लेकर गया लेकिन उन्हें वही जगह पसंद आई। उन्होंने रायपुर छोड़ने से पहले ही घोषणा कर दी थी कि एम्स उसी जगह पर बनेगा। सुषमा ने खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी से चर्चा कर एम्स के लिए जमीन देने पर भी राजी कर लिया था। यूपीए सरकार के समय जब-जब एम्स के निर्माण टलने की बात आती रही, सुषमा जी ने पूरी प्रखरता से संसद में इसे उठाया।
  2. एक बारगी तो यूपीए के स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा भी कि सुषमा जी के दबाव से ही सभी छह एम्स निर्माण को हमें मंजूरी देनी पड़ी। इतना ही नहीं केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में सुषमा जी ने रायपुर दूरदर्शन और आकाशवाणी केंद्रों में आधुनिक स्टूडियो, मेट्रो चैनल के साथ तीन नए दूरदर्शन केंद्र भी स्थापित किए। मैं स्तब्ध हूं। एक सप्ताह पहले ही मैं दिल्ली जाकर उनसे घर में मिला था।
  3. उन्होंने मुझे राज्यपाल बनने की बधाई दी। मेरा उनका भाई-बहन का संबंध था। मैंने उन्हें सुषमा दीदी के अलावा कुछ नहीं कहा। जब वे रायपुर आतीं बिना मेरे घर-परिवार से मिले दिल्ली नहीं लौटतीं। विदेश मंत्री के रूप में वे ट्विटर और ई मेल के जरिए भी विदेशों में मुश्किल में फंसे भारतीयों की मदद के लिए 24 घंटे तत्पर रहतीं। सबका दिल जीतने वाली सुषमा दीदी खुद आज हारकर चली गईं।
  4. कहा- 3 माह में दूरदर्शन केंद्र अपडेट हो जाएगा, हुआ भी ऐसा

    वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बताया- मध्यप्रदेश के जमाने में हम छत्तीसगढ़ के दूरदर्शन को अपडेट करने की मांग के साथ उनके पास गए थे। रमेश बैस उस समय उनके साथ राज्यमंत्री थे। सुषमाजी ने कहा कि तीन महीने में दूरदर्शन केंद्र अपडेट हो जाएगा और रमेश बैस उसका उद्घाटन करेंगे। हुआ भी ऐसा ही। 1990 से 93 के बीच में जब मैं मध्यप्रदेश में मंत्री था तो बहुत से कार्यक्रमों में उनके साथ शामिल होने का सौभाग्य मिला।

  5. 40 मिनट बोलना था, बगैर घड़ी देखे उतना ही बोलीं सुषमा

    भाजपा के मीडिया से जुड़े पंकज झा याद करते हैं- क़रीब 15 वर्ष पुरानी बात होगी। मीडिया प्रशिक्षण के एक कार्यक्रम में हमलोगों को संबोधित करने सुषमा जी आईं थीं। उनके लिए 40 मिनट का समय आरक्षित था। जहां तक स्मरण है उन्हें 12.20 बजे से बोलना था। समय से आईं। अपनी स्वाभाविक भाषा में पूरे 40 मिनट बोली और उद्बोधन समाप्त करते हुए उन्होंने कहा – ‘आप सबलोग घड़ी देख लीजिए। एक बज रहा होगा। इसे भी आप सब अपने प्रशिक्षण का हिस्सा समझिए कि जितना समय आपको दिया जाए, ठीक उतने में ही आपकी पूरी बात समाप्त हो जानी चाहिये। मेरी बात समाप्त हुई। धन्यवाद।’




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *