चौंका देगी सड़क हादसों की रिपोर्ट, 2018 में गई 4 हजार लोगों की जान, रायपुर पहले नंबर पर

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रायपुर. सड़क हादसों (Road Accident) में मौत के मामले में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी के साथ कई और हैरान करने वाली रिपोर्ट (Report) सामने आई है. सूबे में पिछले साल करीब 14 हजार सड़क हादसों में 4556 लोगों की जान गई. इसमें तकरीबन 3200 मृतक ऐसे हैं जो दो पहिया वाहनों में थे. इन 3200 में से करीब 2450 लोगों की मौत हेड इंजरी की वजह से हुई है, जिसके चलते प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ दिन पर दिन बढ़ता जा रह है, जिसके चलते सड़क हादसों में जान गवाने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. सड़क हादसों में सबसे ज्यादा हादसे रायपुर (Raipur) जिले में हो रहे है.

सड़क हादसों में बढ़ती मौत पर पुलिस की रिपोर्ट में खुलासा

गठन के 19 साल पूरे कर चुके छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है. यह भयावह आंकड़े सड़कों के विकास और यातायात जागरूकता के नाम पर करोड़ों रूपए खर्च करने वालों की पोल खोलने की लिए काफी है. साल दर साल सड़कों हादसों में मौत के बढ़ते आंकड़े सड़क सुरक्षा और जागरूकता अभियान की पोल खोल रहे है. वहीं इतना ही नहीं राज्य में 150 नए मौते के ब्लैक स्पाट भी चिंहित किए गए हैं. सड़क हादसों के चार सालों के आंकड़ों को देखे तो काफी डरावने है.
स्थानीय लोगो में आक्रोश

सड़क हादसों को लेकर राजधानी रायपुर की रहनी वाली संगीता कुमारी और राज कुमार कहते हैं कि सड़क सुरक्षा के नाम पर तो बाते सभी करते है, लेकिन यहां की जो सड़के है उनकी हालत बड़ी खराब है. इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं हैं. इसके चलते आम लोगों में काफी आक्रोश है.

राजनीतिक दल की प्रतिक्रिया

प्रदेश के बीजेपी शासनकाल में कृषि मंत्री रहे चंद्रशेखर साहू का कहना है कि यहां पर ड्रिंक करके वाहन चलाने वालों की संख्या ज्यादा है. इसलिए सड़क हादसों की दुर्घटनाएं ज्यादा हो रही है. राज्य शासन को लगातार मॉनिटरिंग करने की जरूरत है और शासन स्तर पर समीक्षा करने की भी बड़ी जरूरत है. तो वहीं सत्ताधारी दल कांग्रेस के प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि लगातार यातायात पुलिस अभियान चलाकर नियम को तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई कर रही है. इसलिए वो खुद पुलिस की प्रशंसा करते थक नहीं रहे है.
पुलिस की दलील

एएसपी ट्रैफिक सतीश सिंह ठाकुर का कहना है कि ज्यादातर दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते हैं. इसलिए जब हादसा होता तो बिना हेलमेट वालों की 80 प्रतिशत से ज्यादा मौत हो जाती है. इसलिए हमारा फोकस दो पहिया वाहन चालकों को हेलमेट लगाने के लिए जागरूक करने पर है.




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