बैठकों का दौर जारी, इसी हफ्ते सरकार जारी कर सकती है वस्तुओं की लिस्ट – एक ही खबर तीखे तेवर

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नई दिल्ली: 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी की सिंगल-यूज प्लास्टिक को बैन (single-use plastic ban) करने की अपील के बाद केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय सक्रिय हो गए हैं. मंत्रालयों में तो इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है. केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) ने प्लाटिक यूज़ बैन करने को लेकर इससे जुड़े सभी सरकारी संस्थाओं और संस्थाओं की बैठक बुलाई, जिसमें सबको पानी शीशे की बॉटल में ही दिया गया. पासवान ने अपने मंत्रालय के सभी विभागों में 15 सितंबर से सिंगल प्लाटिक यूज बैन को लागू करने के लिए कहा है.

बैठक में आए संस्थाओं की तरफ़ से पेपर बोटल का सुझाव आया, शीशे की बोतल का सुझाव आया. ये भी कहा गया कि पेपर की बोतल में इस नियम को लागू करना मुश्किल है क्योंकि उसमें भी प्लाटिक शामिल होता है. जहां तक शीशे की बोतल का सवाल है तो वो आम आदमी के लिहाज़ से महंगा होगा. इसीलिए सभी ने ये कहा कि जो भी विकल्प तलाशे जाए उसमें कीमत का भी ध्यान रखा जाए. पासवान ने सभी मैन्युफैक्चरर को 3 अपना सुझाव देने के लिए दिन का समय दिया है. उसके बाद इन सुझावों को कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी हाई पावर कमेटी को सौंपा जाएगा.

इंसान के लिए खतरा, प्लास्टिक बम पर बैठी दुनिया!

वैसे बैठक में मौजूद प्लाटिक बोतल इंडस्ट्री के लोगों की नाराजगी साफ नजर आई. उन्होंने तो प्लाटिक यूज़ बैन होने की हालत में देश में बेरोजगारी बढ़ने का डर भी जता दिया. प्लास्टिक बोतल इंडस्ट्री के लोगों के मुताबिक 30 हज़ार करोड़ की इंडस्ट्री सिर्फ़ पानी के बोतल की है. अगर ये बंद हुआ तो करीब 7 लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे जबकि प्लाटिक से जुड़े सभी इंडस्ट्री को जोड़ दें तो इस इंडस्ट्री के बंद होने से कुल मिलाकर 7 करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे. हालांकि रामविलास पासवान ने बेरोजगारी के दावे को खारिज़ करते हुए ये कहा कि जो विकल्प आएगा, उससे रोजगार घटने के बजाय और बढ़ेगा.

आज की बैठक में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के वरिष्ठ अधिकारी, उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव,  वरिष्ठ अधिकारी, देश के प्रमुख प्लास्टिक उत्पाद निर्माता, सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ प्‍लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्‍नोलॉजी (CIPET) के प्रतिनिधि और इससे जुड़े अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए. 
 




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